संयुक्त वाम दलों के आह्वान पर भाकपा माले द्वारा लॉक डाउन का पालन करते हुए एकदिवसीय धरना का आयोजन

औरंगाबाद, बिहार।

संयुक्त वाम दलों के आह्वान पर भाकपा माले के द्वारा लॉक डाउन का पालन करते हुए एकदिवसीय धरना का आयोजन किया गया। यह धरना भाकपा माले के जिला सचिव कॉ मुनारिक राम के नेतृत्व में ग्रामीण मजदूरों के साथ ग्राम चपरा ओबरा में किया गया। भाकपा माले ने मांग किया कि पीएम केयर फंड से सभी मजदूरों को उनके घर पहुचाये सरकार। सभी मजदूरों को 10 हजार रुपये गुजरा भत्ता, मारे गए मजदूरों को 20 लाख मुआवजा, बिना कार्ड वालों सहित सभी मजदूरों को तीन महीने का राशन औऱ काम की गारंटी करे सरकार।

भाकपा माले ने प्रवासी मजदूरों से घर पहुचाने के एवज में उनसे पैसा वसूलने के सरकार के आदेश की कडी निंदा की है और इसे मजदूर औऱ मानवता विरोधी कदम बताया है। डबल इंजन की तथाकथित सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब दिल्ली पटना में भाजपा जदयू, की ही सरकार है तो प्रवासी मजदूरों को वापस लाने में देरी क्यों हो रही है नीतीश कुमार सुशील मोदी इसका जवाब दें।

भाकपा माले जिला सचिव कॉम मुनारिक राम ने कहा कि जनांदोलनों के दबाव में केंद्र सरकार प्रवासी मजदूरों औऱ छात्रों को घर भेजने पर तो सहमत हुई लेकिन अपने आधिकारिक नोटिफिकेशन में वह छलावा कर रही है।सिर्फ उन्हीं मजदूरों को वापस लाने की इजाजत मिली है जो अचानक हुए लोक डाउन के कारण देश के दूसरे हिस्से में फंस गए थे जो पहले से वहाँ काम कर रहे हैं उनको नहीं लाया जाएगा।

सच्चाई यह है कि लॉक डाउन के बाद फैक्ट्री बंद हो गए और पहले से काम कर रहे मजदूर भी सड़कों पर आ गए और वे तमाम तरह की परेशानियां झेल रहे हैं समझ से बाहर है कि सरकार इन्हें क्यों लाना नहीं चाहती है। बिहार के 40 लाख से ज्यादा मजदूर देश के अन्य दूसरे हिस्से में काम करते हैं आज वे बेहद नारकीय जीवन जी रहे हैं।

आखिर सरकार उन्हें क्यों नहीं लौटने दे रही है ऐसा लगता है जैसे मजदूर आदमी नहीं पूंजीपतियों के बंधुआ मजदूर हैं,उन्होंने नीतीश कुमार द्वारा आज जारी प्रवास मजदूरों के लिए किराया देने वाले बयान को भी भ्रामक औऱ छलावा बताया, मुख्यमंत्री ने कहा है कि दूसरे राज्यों से आने के बाद मजदूरों को क्वारेन्टीन सेंटर में रखा जायेगा और क्वारेन्टीन के बाद जब मजदूर घर जाने लगेंगे उस समय ट्रेन से आने में हुआ खर्च उन्हें दिया जायेगा, मतलब जो मजदूर अपने पैसे से बिहार लौटेंगे, उनका पैसा ही वापस होगा जिनके पास पैसा नहीं होगा वे कैसे लौटेंगे?


आज मजदूर दूसरे राज्यों में दाने- दाने को मुहताज हैं उनसे किराया का पैसा जुटाने को कहना उनके साथ क्रूर मज़ाक है। हमारी मांग है कि जो भी मजदूर लौटना चाहते हैं उनके लिए केंद्र सरकार पीएम केयर फंड से राशि मुहैया कराए सेनिटाइजर रेल की सुविधा प्रदान करे,10 हजार लॉक डाउन भत्ता दे,मृतक परिवारों को 20 लाख रुपये मुआवजा दे और उनके काम की गारंटी करे।

इस धरना अरविन्द यादव, अशोक पासवान, हरेन्द्र कुमार, रामजन्म राम,राजदेव राम,कमलेश राम,बलि पासवान, बाड़ू राम अभिषेक कुमार अमित कुमार इत्यादि शामिल हुए।

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