“दिवालिया होने की कगार पर खड़ा पाकिस्तान…?”

(हिमांशु अरुण पांडेय)

भूगोल बताता है कि धरती पर 195 देश हैं। इतिहास बताता है कि मानव सभ्यता विकसित होने के क्रम में कोई न कोई देश हमेशा मिट जाने की कगार पर खड़ा रहा है। कभी युद्ध की वजह से, कभी सिविल वॉर की वजह से, कभी अर्थव्यवस्था ठप होने की वजह से। 21वीं सदी की शुरुआत में यह बदनसीबी पाकिस्तान को हासिल है। वह मुस्लिम देश, जिसने 1947 में भारत कि आज़ादी के साथ खुद की आज़ादी देखी । जिन्ना ने जिस सपने को लेकर पाकिस्तान मुल्क की नींव रखी उसकी इमारत अब ध्वस्त होती दिखाई पड़ रही है ।इमरान खान ने जिस पाकिस्तान को जिन्ना के सपनों का मुल्क बनाने की उम्मीदें जगाई थी वह अब खत्म होती नज़र आ रही है। हाल ही में प्रतिष्ठित आर्थिक समाचार पोर्टल ब्लूमबर्ग ने पाकिस्तानी रुपए को एशिया की सबसे बदतर मुद्रा क़रार दिया है। पाकिस्तान ने जब से आईएमएफ़ से बेलआउट पैकेज पर समझौता किया है, तबसे लगभग हर चीज़ की क़ीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।पाकिस्तान में पेट्रोल अब 112 रुपए 68 पैसे प्रति लीटर मिल रहा है । वहीं इसके साथ ही मुल्क में बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई चरम पर है। वहीं दूध की कीमत भी 200 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है । पाकिस्तान में प्याज के दाम 77.52 फीसदी, तरबूज 55.73 फीसदी, टमाटर 46.11 फीसदी, नींबू 43.46 फीसदी और चीनी 26.53 फीसदी महंगी हो गई है। बात करें फल और मीट की तो सेब 400 रुपये किलो, संतरे 360 रुपये और केले 150 रुपये दर्जन बिक रहे हैं। पाकिस्तान में मटन 1100 रुपये किलो तक पहुंच गया है। सरकार बार-बार कह रही है कि ये परेशानी केवल कुछ समय के लिए है और दो महीन के बाद हालात में सुधार होगा ।मगर दिवालिया होने की कगार पर खड़े पाकिस्तान यह कथन जुमला ही प्रतीत हो रहा है ।पुलवामा हमले के बाद से भारत सरकार ने पाकिस्तान को दिया मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा छीनने का फैसला लिया था और भारत द्वारा पाकिस्तान से आयात होने वाले सभी सामानों पर सीमा शुल्क 200 फीसदी बढ़ाने से पड़ोसी मुल्क को झटका लगा था। इसके बाद से ही कयास लगाए थे की पाकिस्तान अपने मुल्क में चल रहे आतंकी प्रशिक्षण शिवरों के खिलाफ उचित कार्रवाई करेगा लेकिन शायद पाकिस्तान अपनी नियति से बर्बाद होने की ही चाहत रखता है।पाकिस्तान ने पिछले महीने 6 अरब डॉलर के राहत पैकेज के लिए अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आइएमएफ) के साथ समझौता किया था। पाकिस्तान के लिए यह मदद डूबते को तिनके का सहारा वाली साबित हो सकती है यदि वह इस राशि का उपयोग अपने वित्तीय संकट को दूर करने और धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए करे। लेकिन दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन को आशंका है कि पाकिस्तान इस आर्थिक मदद का उपयोग चीन के कर्ज को चुकाने में कर सकता है।इमरान खान और उनकी कैबिनेट ने इस गिरती हुई अर्थव्यवस्था को उठाने के लिए कई कदम उठाये है। पाकिस्तान सरकार के कुल खर्चे में से करीब 50% हिस्सा सेना और कर्जों को चुकाने में जाता है। ऐसे आर्थिक हालात को देखते हुए पाक सेना ने स्वेच्छा से अपने बजट में कटौती का ऐलान किया है। वहीं पाक सरकार पर्यटन के लिए विदेश जा रहे पाकिस्तानियों को 10,000 डॉलर रकम से घटाकर 3,000 डॉलर सीमित मात्रा में डॉलर देने का फैसला ले सकती है।कहते है समस्या चारों दिशाओं से एक साथ आती है आतंकी फंडिंग रोकने के लिए बनी अंतरराष्ट्रीय एजेंसी फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की पाकिस्तान को चेतावनी के बाद अब भारत ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई है । वहीं एफएटीएफ ने पाकिस्तान को ‘ग्रे सूची’ में रखने का फैसला लिया है । ज्ञात हो की इस सूची में अबतक इथोपिया, सर्बिया, श्रीलंका, सीरिया, ट्रीनिदाद एंड टोबैगो, ट्यूनिशिया और यमन शामिल थे। लेकिन पाकिस्तान में चल रही आतंकी गतिविधियों और भारत में हुए पुलवामा हमले के दवाब बाद से ही पाकिस्तान को इस सूची में शामिल किया गया है ।फिलहाल क्रिकेट का मैदान हो या अर्थव्यवस्था की रफ़्तार पाकिस्तान को हर तरफ से नाकामियां ही हाथ लग रही है।

जहां एक ओर वर्ल्डकप में पाकिस्तानी टीम अंकतालिका में 10 में से 9 वे स्थान पर है वहीं एशियन डेवलपमेंट बैंक ( एडीबी) ने पाक को 3.4 अरब डॉलर की मदद करने से इनकार कर दिया है। इमरान खान पाकिस्तान की अवाम को कितने ही बड़े सपने दिखा दे लेकिन ज़मीनी हकीकत पर यह तस्वीर धुंधली ही नज़र आती है।अब देखना यह होगा कि पाकिस्तान के वज़ीर-ए-आज़म इमरान खान कैसे इन आर्थिक चुनौतियों से निपटते हुए पाकिस्तान की डगमगाई हुई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का काम करते हैं , क्योंकि वर्तमान में उनके सिर पर चुनौतियों की जो तलवार लटकी है उससे निपट पाना टेढ़ी खीर साबित होगी ।

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